मेरे हृदय में जाग्रत होकर, मेरा मान बढ़ा दे तू!
मैं तेरी धुन पर गाऊँ, इतना सम्मान दिला दे तू!!
जब रात घनी अंधेरी हो, तेरी लोरी सुन सो जाऊँ!
जब प्रातः अरुणोदय हो, तेरी भक्ति में खो जाऊँ!!
हर दुख में तू साथ रहे, मेरा कष्ट मिटाने को!
हर सुख में तू पास रहे, मुझमें प्रेम जगाने को!!
जो कुछ थोड़ा बाकी है, वह अभिमान गला दे तू!
मेरे हृदय में जाग्रत होकर, मेरा मान बढ़ा दे तू!!
मैं तेरी धुन पर गाऊँ, इतना सम्मान दिला दे तू!!
जब रात घनी अंधेरी हो, तेरी लोरी सुन सो जाऊँ!
जब प्रातः अरुणोदय हो, तेरी भक्ति में खो जाऊँ!!
हर दुख में तू साथ रहे, मेरा कष्ट मिटाने को!
हर सुख में तू पास रहे, मुझमें प्रेम जगाने को!!
जो कुछ थोड़ा बाकी है, वह अभिमान गला दे तू!
मेरे हृदय में जाग्रत होकर, मेरा मान बढ़ा दे तू!!
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