कोई भी किसी को धोखा नहीं देता। आदमी अपनी काल्पनिक अपेक्षाओं के कारण धोखा खाता है, अंधविश्वास के कारण धोखा खाता है।
लोग अपनी ही आँखों पर हथेली रख लेते हैं और कहते हैं कि अंधेरा छा गया है।
सत्य की रोटी का स्वाद भले ही फीका लगे, लेकिन काल्पनिक परांठों से पेट नहीं भरता।
लोग अपनी ही आँखों पर हथेली रख लेते हैं और कहते हैं कि अंधेरा छा गया है।
सत्य की रोटी का स्वाद भले ही फीका लगे, लेकिन काल्पनिक परांठों से पेट नहीं भरता।
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